आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज एवम तपोभूमि प्रणेता मुनि श्री प्रज्ञा सागर जी का वात्सल्य मिलन

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धरती के देवताओं का अदभूत मिलन- जिनशासन की हुयी अभूतपूर्व प्रभावना
8-जनवरी – जैसा कि यह सबको विदित ही है कि आचार्य भगवन श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र मदनपुर मडावरा जिला ललितपुर (उ.प्र) के लिए चल रहा है और पूज्य गुरुदेव प्रज्ञासागरजी महाराज का भी विहार पुष्पगिरी तीर्थक्षेत्र से उज्जैन की ओर 8 जनवरी को दोपहर में होने वाला था।
एक अदभुत मिसाल इस दौरान देखने को मिली कि जैसे ही आचार्य गुरुवर विशुद्ध सागरजी महाराज को पता चला कि मुनि प्रज्ञा सागरजी पुष्पगिरी से उज्जैन की ओर विहार करते इसी रास्ते से आ रहे हैं, तो उन्होने बडे विनम्र भाव से कहा कि मैं उनसे मिलना चाहता हूँ।
वहां उपस्थित भक्तों ने जब बताया कि प्रज्ञासागरजी महाराज को यहाँ पहुंचने में लगभग 50 मिनट लगेंगे, तो आचार्य गुरुवर ने वात्सल्य भाव से कहा कि मैं उनका इन्तजार करूंगा !
आचार्य श्री ने इतिहास के स्वर्णिम पन्नो पर लिखी जाने वाली मिसाल दी, जिसे सुनकर सब भाव विभोर हो गये। आचार्य गुरुवर 50 मिनट रुके और प्रज्ञा सागरजी से धर्म चर्चा की। दोनों आपस मे गले मिले। ऐसे पावन प्रसंग को देख भक्तजन भी भाव विभोर हो गए ।
मुनि श्री प्रज्ञा सागरजी ने गुरुवर के साथ 3 KM का पद विहार भी किया।
ऐसे अदभुत क्षण ही जिनशासन को जयवंत करते है।

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