ईश्वर वस्तु नहीं अनुभूति है : मुनि श्री तरुण सागर

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पानीपत : ईश्वर कोई वस्तु नहीं है, ईश्वर तो अनुभूति है। अनुभूति के दर्शन नहीं होते, इसे तो अनुभव किया जा सकता है। ईश्वर के दर्शन नहीं होते। जिस प्रकार शरीर मे चोट लगने से दुख अनुभव होता है, उसी प्रकार भगवान भी हैं। चलते रहना संतों के जीवन की चर्या है। संत कहीं से चलना शुरू होते हैं और कहीं पर चले जाते हैं।

13091891_1081196591941066_1928570613438450016_nमॉडल टाउन में सोमवार को आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में मुनिश्री तरुण सागर ने ईश्वर के स्वरूप को समझाया। उन्होंने कहा कि ईश्वर का कोई रूप या आकार नहीं होता। संत जहां पहुंचते हैं, वहां कोई कोई घटना होती है। जिस जगह संत आते हैं, वह क्षेत्र सोना सोना हो जाता है। इनके जाने के बाद वह क्षेत्र सूना-सूना हो जाता है। संत और संसारी में इतना ही फर्क होता है। संसारी का मन कहीं टिकता नहीं और संत के पैर कहीं टिकते नहीं। बहता हुआ जल और फिरता संत हमेशा पवित्र होते हैं। श्री दिगंबर जैन पंचायत के प्रवक्ता ने बताया कि मुनिश्री तरुण सागर के कड़वे प्रवचन शृंखला 27 अप्रैल से शुरू होकर 1 मई तक मॉडल टाउन स्थित शिवाजी स्टेडियम में होगी। प्रधान ने बताया कि शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य अतिथि रहेंगे। इस दौरान कड़वे प्रवचन के आठ भागों के नवीन संस्करण का विमोचन होगा।

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