जैन मुनि की असाध्य यात्रा : रविश कुमार

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बहुत दूर तक जला देने वाली तपती गर्मी में जैन मुनी को असाध्य यात्रा करते देखता रहा। हमारे सामने साधु संतों की अनेक छवियाँ हैं, मगर इतनी गर्मी में आसान नहीं है, बिना जूते के नंगे पाँव सामान उठाए दूर तक चलते जाना। रास्ते भर तमाम कारें तीव्र रफ़्तार से उनसे आगे निकल रही थीं मगर उनकी होड़ रफ़्तार से थी ही नहीं। कोई बोल नहीं रहा था। एकदम मौन । सब अपनी अपनी यात्रा पूरी कर रहे थे। मेरे साथ चल रहे सज्जन ने बताया कि किसी भी आधुनिक मशीन का इस्तमाल नहीं करते हैं। पूरे भारत में इसी तरह घूमते हैं। एक जगह से दूसरी जगह पर जाना विहार कहते हैं। पैदल चल कर तीर्थ करने के कई दृश्य हमारे सामने हैं।

मगर वो सब नियत समय में जाकर लौट आने के हैं। निरंतर चलते रहने का यह दृश्य अनोखा है। दस पंद्रह लोगों की टोली में चले जा रहे लोगों से लगा कि जीवन और उसके सत्य पर बहस करूँ। जिस गर्मी में मैं कार से सर बाहर नहीं निकाल सकता था, उसमें वो पैदल चले जा रहे थे। हर सुख सुविधा को नकारते हुए। हम जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं। मेरा संघर्ष जानने को लेकर है। क्या हम जानते हैं कि कोई एेसे भी जी कर दिखा सकता है? इच्छा हो रही है कि एक पूरा दिन इस यात्रा को कैमरे से शूट करूँ। ऐसी ही किसी वीरान इलाके से गुज़रती हुई सुनसान सड़क पर । सादर नमन ।

रविश कुमार की फेशबुक वॉल से साभार

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