मुनि पुलक सागर का चातुर्मास अजमेर में

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संघपति पदस्थापना समारोह में हुई घोषणा, अभिनेता सुनील शेट्टी भी हुए शामिल

11101957_1609684072649048_8383100026971610124_nउदयपुर :  इस साल राष्ट्रसंत मुनि पुलक सागर का चातुर्मास अजमेर में होगा। इसकी घोषणा रविवार को सेक्टर 11 में हुए समारोह में मुनिश्री ने ही की। घोषणा होते ही अजमेर से आए श्रावकों में खुशी की लहर छा गई। समारोह में जुटे उदयपुर सकल दिगंबर जैन समाज के श्रावकों में मायूसी दिखी। चातुर्मास की घोषणा सुनने और संघपति पदस्थापना देखने बड़ी संख्या में श्रावकों की मौजूदगी रही। तीन जून को करेंगे विहार ।

जैन समाज में पहली बार मुनि के विहार प्रबंध के लिए संघपति नियुक्त किया गया है। मुनि पुलक सागर के संघपति के रूप में भोपाल के प्रदीप जैन ‘मामा’ को पदभार ग्रहण कराया गया।

10698653_901625066564887_8647015575749330839_nमुख्य अतिथि अभिनेता सुनील शेट्टी भी मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ शुरू हुआ समारोह संघपति पदस्थापना पर संपन्न हुआ। इस बीच आधे घंटे के लिए आए सुनील शेट्टी ने कहा कि जीवन में गुरु का होना बेहद जरूरी है। गुरु की भूमिका अंधेरी रात में रोशनी के समान है। शेट्टी ने मुनिश्री से आशीर्वाद लेने के साथ ही पुलक साहित्य का विमोचन किया। इस मौके पर मुनिश्री ने कहा कि अभिनेता की जिंदगी परदे की और संत की बेपरदा। जिंदगी के अभिनय में सबके अपने रोल, लेकिन अंत सभी का होना है। ये हमें तय करना है कि रोल हीरो का निभाना है या विलेन का। रोल ऐसा हो कि दुनिया याद करे। समारोह में अभिनेता सुनील शेट्‌टी और अतिथियों ने पुलक साहित्य का विमोचन किया।

मुनि पुलक सागर का आगामी चातुर्मास अजमेर में होगा। इसके लिए वे 3 जून सुबह विहार करेंगे। वे राष्ट्रीय राजमार्ग 76 (चित्तौड़गढ़ रोड) से विहार करेंगे। मुनिश्री के चातुर्मास के लिए अजमेर और उदयपुर सहित डूंगरपुर, ऋषभदेव, नसीराबाद के श्रावक विनती कर रहे थे।

11391742_901624403231620_761220323260200155_nये नहीं सोचा था कि बेटा राष्ट्र संत कहलाएगा : मुनिश्री की सांसारिक मां गोपी बाई ने बातचीत में कहा कि जन्म पर बेटे की कुंडली बनवाई तो पंडित ने कहा था कि तुम्हारा बेटा बड़ा नाम कमाएगा। बेटा 10वीं कक्षा से ही संतों के पीछे लग गया तो मैं डांटती थी। चाहती थी पढ़कर कुछ बन जाए, लेकिन बेटे का मन पढ़ाई में नहीं लगता। पिता का निधन हो चुका था तो मैं बहुत दुखी थी। दादी माताजी हो गई, चाचा ने भी दीक्षा ली। पूरा परिवार धार्मिक भावना में रहा तो बेटे ने भी दीक्षा लेने की जिद की। मैं चाहती थी पढ़-लिखकर कुछ बन जाए। ये नहीं सोचा था कि बेटा राष्ट्र संत कहलाएगा।

 

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